शिवलिंग: अनंत ऊर्जा और सृष्टि का प्रतीक

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शिवलिंग हिंदू धर्म में भगवान शिव के निराकार रूप का प्रतीक है, जो सृजन, पालन और संहार की अनंत शक्ति का द्योतक है। यह न केवल भक्ति का केंद्र है, बल्कि वैज्ञानिक दृष्टि से भी ऊर्जा और सकारात्मकता का स्रोत माना जाता है।

शिवलिंग का आकार ब्रह्मांड की अनंतता और ब्रह्मा, विष्णु तथा महेश की त्रिगुणात्मक शक्ति को दर्शाता है। इसकी अंडाकार संरचना सृष्टि के मूल स्वरूप को व्यक्त करती है। भक्तजन शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, भस्म और धतूरा अर्पित कर भगवान शिव को प्रसन्न करने का प्रयास करते हैं। रुद्राभिषेक और महामृत्युंजय मंत्र के जाप से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है और व्यक्ति को मानसिक शांति मिलती है।

भारत में कई प्रसिद्ध शिवलिंग हैं, जिनमें काशी विश्वनाथ, महाकालेश्वर, सोमनाथ और अमरनाथ विशेष रूप से पूज्यनीय हैं। 12 ज्योतिर्लिंगों की यात्रा से मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।

महाशिवरात्रि के अवसर पर शिवलिंग की पूजा का विशेष महत्व है। यह हमें यह संदेश देता है कि शिव ही आदि और अनंत हैं, और उनकी आराधना से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है।

“ॐ नमः शिवाय!”

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