13th June 2021

UN ने कहा- 130 देशों के पास वैक्सीन का एक सिंगल डोज तक नहीं, यह बहुत बड़ी नाइंसाफी

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संयुक्त राष्ट्र महासचिव (UN secretary general) एंतोनियो गुटेरेस के मुताबिक दुनिया में 130 देश हैं, जिनके पास कोविड-19 वैक्सीन का एक सिंगल डोज तक नहीं पहुंचा। यह बहुत बड़ी नाइंसाफी है। सिक्योरिटी काउंसिल की मीटिंग के दौरान गुटेरेस ने कहा- बहुत दुख और गुस्सा है कि हम दुनिया के 130 देशों को महामारी से निपटने के लिए वैक्सीन का एक डोज तक नहीं दे सके। वहीं, 10 देश ऐसे हैं जहां 75% वैक्सीनेशन प्रॉसेस पूरा हो चुका है। इससे साफ हो जाता है कि वैक्सीन डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम कितना गैरबराबरी वाला है। अगर हमें महामारी से उबरना है तो किसी भी हाल में और किसी भी कीमत पर सबको वैक्सीन मुहैया करानी होगी।

इंग्लैंड के लिए नई परेशानी- इंग्लैंड में संक्रमण पर दो तिहाई तक काबू पाया जा चुका है, लेकिन यहां एक नई परेशानी सामने आ रही है। ‘द गार्डियन’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इंग्लैंड में अब संक्रमण की चपेट में युवा ज्यादा आ रहे हैं। चिंता की बात यह है कि इनमें बच्चे भी शामिल हैं। हाल ही में इम्पीरियल कॉलेज ने एक स्टडी की। इसमें साफ हुआ प्राइमरी स्कूल के बच्चे भी संक्रमण के शिकार बन रहे हैं। देश में नए वैरिएंट्स सामने आए हैं, लेकिन यह बहुत ज्यादा खतरनाक साबित नहीं हुए। ज्यादातर मामले अब भी पुराने वैरिएंट के ही सामने आ रहे हैं।

होटल्स का वेंटिलेशन सिस्टम खतरा- ब्रिटेन के कुछ एक्सपर्ट्स द्वारा तैयार रिपोर्ट में दावा किया गया है कि देश के कुछ होटल्स का वेंटिलेशन सिस्टम खराब है और इनकी वजह से संक्रमण खतरनाक रूप ले सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक- दूसरे देशों से आने वाले कुछ लोगों को होटल्स में क्वॉरैंटीन किया जा रहा है। इन होटल्स का वेंटिलेशन सिस्टम अच्छा नहीं है। इसकी वजह से एयरफ्लो के जरिए वायरस बाहरी हिस्सों में पहुंच सकता है और इसकी वजह से कम्युनिटी ट्रांसमिशन का खतरा बना हुआ है। यह रिपोर्ट सरकार को भी सौंपी गई है।

अमेरिका एयरलाइंस को नुकसान- ‘द गार्डियन’ ने अमेरिकी एविएशन एक्सपर्ट्स की एक रिपोर्ट के हवाले से दावा किया है कि देश के सिविल एविएशन सेक्टर में 1984 के बाद पिछले साल यानी 2020 में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई। इस दौरान 60% की गिरावट दर्ज की गई। 2020 में सिर्फ 368 मिलियन पैसेंजर्स ने एयरलाइंस का इस्तेमाल किया। 2019 में यही संख्या 922.6 मिलियन थी। इसके पहले 1984 में यह आंकड़ा महज 351.6 मिलियन था। एक्सपर्ट्स का मानना है कि 2023 या 2024 तक ही हालात सामान्य हो पाएंगे।

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