13th July 2020

आखिर क्या हैं नदी में इन हजारों शिवलिंग के पीछे का रहस्य !

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हम सब जानते हैं कि, भारत देश को अपने अनोखेपन के लिए पूरे विश्व में जाना जाता हैं जहाँ कई ऐसी जगहें है जो अपनी विचित्रता के लिए जानी जाती हैं । ऐसी ही एक अनोखी जगह हैं कर्नाटक में जहाँ एक नदी के अंदर हजारों शिवलिंग देखने को मिलते हैं । लेकिन सवाल ये उठता है कि आखिर नदी में हजारों शिवलिंग आए कहाँ से । आपकी जानकारी के लिए बता दें कि, इस पवित्र स्थल को सहस्त्रलिंग कहा जाता है, जो कर्नाटक के सिरसी से 14 किलोमीटर दूर बसा है । यहीं पर शलमाला नदी के तट पर एक हजार से अधिक प्राचीन शिवलिंग और उसके साथ ही पत्थरों पर उकेरे हुए नंदी बैल की प्रतिमाओं के दर्शन होते हैं ।

इस जगह के बारे में ऐसा कहा जाता है कि, नदी के तट पर इन शिवलिंगों और प्रतिमाओं का निर्माण विजयनगर साम्राज्य के राजा सदाशिवराय वर्मा ने साल 1678 से लेकर 1718 के बीच करवाया था । यहां हर साल महाशिवरात्री पर मेला लगता है । वैसे तो यहां मौजूद शिवलिंग और चट्टानों पर बनी आकृतियां बारिश के मौसम में नदी के पानी में डूबी रहती हैं, लेकिन जैसे ही जलस्तर घटने लगता है, हजारों की संख्या में शिवलिंग अचानक दिखने लगते हैं । सहस्त्रलिंग जैसा ही नजारा कंबोडिया में भी एक नदी में देखने को मिलता है। इस जगह की खोज साल 1969 में जीन बोलबेट ने की थी । आपकी जानकारी के लिए बता दें कि, यहां शिवलिंग राजा सूर्यवर्मन प्रथम के समय पर बनना शुरू हुआ था और राजा उदयादित्य वर्मन के समय तक पूरी तरह बनकर तैयार हो गया ।

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