Wed. Sep 18th, 2019

पांच योद्धा जो रामायण और महाभारत दोनों में थे प्रमुख पात्र

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रामायण और महाभारत दोनों ऐसे महाकाव्य हैं जिसका सनातन धर्म में विशेष स्थान है। रामायण और महाभारत दोनों में ऐसे पात्र थे जिनको भुलाया नहीं जा सकता। इन्हीं पात्रों में कुछ ऐसे थे जो दोनों समय जीवित रहे। जिन्होंने रामलीला भी देखी और महाभारत का युद्ध भी। आइए जानते है कौन थे वे प्रमुख पात्र…

 

भगवान परशुराम – भगवान परशुराम ने रामायण में सीता स्वयंवर में धनुष टूटने के बाद भगवान राम को चुनौती दी थी। भगवान राम ने परशुराम जी को अपना सुदर्शन चक्र सौंपा था। द्वापर युग में भगवान श्री कृष्ण को परशुराम जी ने सुदर्शन चक्र वापस किया।

 

भगवान हनुमान- हनुमानजी को चिंरजीवी होने का आशीर्वाद मिला हुआ है। वे कलयुग में आज भी हैं। हनुमानजी ने भगवान राम की सेना का नेतृत्व लंका विजय के लिए किया था। महाभारत के युद्ध में हनुमानजी अर्जुन के रथ पर थे और विजयी बनाने में सहयोग किया था।

 

जामवंत- जामवंत की इच्छा थी कि भगवान से मल्लयुद्ध करें। राम जी ने इन्हें वचन दिया कि अगले अवतार में वह इस इच्छा पूर्ण करेंगे। एक बार श्रीकृष्ण एक गुफा में प्रवेश कर गए। इस गुफा में जामवंत पहले थे। जामवंत के साथ 8 दिनों तक श्रीकृष्ण युद्ध करते रहे। इसके बाद जामवंत को एहसास हुआ कि श्रीकृष्ण वास्तव में उनके प्रभु राम हैं। इसके बाद जामवंत ने अपनी पुत्री जामवंती का विवाह श्रीकृष्ण से कर दिया।

 

मयासुर- रावण के ससुर मयासुर थे। महाभारत काल में भगवान श्रीकृष्ण ने जब इसके प्राण लेने चाहे तब अर्जुन ने मायासुर को जीवनदान दिलाया।

 

महर्षि दुर्वासा- महर्षि दुर्वासा भी एक ऐसे महापुरुष हैं जिन्होंने रामायण भी देखा और महाभारत भी। एक कथा के अनुसार दुर्वासा के शाप के कारण लक्ष्मणजी को राम जी को दिया वचन भंग करना पड़ा था। महाभारत काल में इन्होंने कुंती को संतान प्राप्ति का मंत्र दिया था।

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