14th July 2020

Hydroxychloroquine का अब ये लोग भी कर सकते हैं इस्तेमाल, ICMR ने बढ़ाया दायरा

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पूरी दुनिया इस वक्त कोरोना महामारी के संकट से जूझ रही है। कोरोना मरीजों की संख्या पूरी दुनिया में 52 लाख को पार कर चुकी है। वहीं अब तक इस घातक बीमारी का कोई वैक्सीन और ड्रग नहीं बन सकी है। हालांकि कोरोना मरीजों पर मलेरिया होने पर दी जाने वाली Hydroxychloroquine दवा का बेहतर नतीजा सामने आया है। ऐसे में कई देशों द्वारा इस दवा का इस्तेमाल किया जा रहा है। भारत इस दवा का सबसे बड़ा निर्यातक है। अमेरिका सहित कई बड़े देशों द्वारा मदद मांगे जाने के बाद भारत की ओर से इस दवा की सप्लाई की गई है। वहीं ICMR ने भी चिन्हित लोगों को इस दवा के इस्तेमाल की छूट दी है। Hydroxychloroquine को लेकर अब ICMR ने एक बार फिर संशोधित परामर्श दिया है। भारतीय आयुर्विज्ञान शोध परिषद यानी ICMR ने इस दवा के दायरे को बढ़ाते हुए गैर कोविड 19 अस्पतालों में काम करने वाले स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के साथ ही अन्य कई सेक्टरों में काम करने वाले लोगों को इसे लेने की सलाह दी है।

ये लोग दवा का कर सकते हैं इस्तेमाल- बता दें कि सरकार ने Hydroxychloroquine को एक निवारक दवा के तौर पर इस्तेमाल करने की सिफारिश की है। सरकार की ओर से जारी की गई संशोधित एडवाइजरी में कहा गया है कि गैर कोविड अस्पतालों में काम करने वाले एसिम्प्टमेटिक हेल्थकेयर वर्कर्स, संक्रमित इलाके में तैनात फ्रंटलाइन वर्कर्स और कोरोना वायरस संक्रमण से जुड़ी गतिविधियों में शामिल पुलिस और अर्धसैनिक बल Hydroxychloroquine दवा ले सकते हैं।

कई देश वैक्सीन पर कर रहे काम- कोरोना संक्रमण ने पूरी दुनिया को बुरी तरह से प्रभावित किया है। विकसित देशों के साथ ही विकासशील देशों की अर्थव्यवस्था भी बुरी तरह से प्रभावित हुई है, वहीं अब तक लाखों लोगों की इस वायरस से जान चली गई है। अब तक इस वायरस का न कोई वैक्सीन और न ही ड्रग बन सकी है। हालांकि अमेरिका, जापान, इजराइल, भारत, चीन सहित कई अन्य देश इसका वैक्सीन खोजने की कोशिश में लगे हुए हैं।

Hydroxychloroquine से नुकसान की भी आशंका- भारत सहित कई देश इस वक्त जहां Hydroxychloroquine का इस्तेमाल कर रहे हैं। वहीं इस दवा से मानव शरीर पर दुष्प्रभाव होने की आशंका भी पैदा हो रही है। स्वास्थ्य क्षेत्र में रिसर्च पब्लिश करने वाली पत्रिका द लैंसेट का कहना है कि इस दवा से फायदा मिलने के कोई सबूत नहीं मिले हैं। साथ ही इस दवा के इस्तेमाल से कोरोना मरीजों की मृत्यूदर भी बढ़ रही है।

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