Sun. Jun 16th, 2019

पैन्क्रियाटिक कैंसर का आया नया इलाज, मौत का खतरा होगा कम

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एक नई स्टडी की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पैन्क्रियाटिक कैंसर के मरीजों को सर्जरी से पहले कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी देने से मौत के खतरे को 5 गुना तक कम किया जा सकता है. यह स्टडी एनल्स ऑफ सर्जरी जर्नल में प्रकाशित की गई है. वैज्ञानिकों का मानना है कि उनकी इस खोज से पैन्क्रियाटिक कैंसर से जूझ रहे लोगों में आशा कि नई किरण जगेगी. शोधकर्ताओं ने बताया, पैन्क्रियाटिक कैंसर एक जानलेवा बीमारी है. दुनियाभर में सालभर में होने वाली 80 फीसदी मौतें पैन्क्रियाटिक कैंसर के कारण होती हैं. वहीं, 5 साल में इस बीमारी के कारण 97 फीसदी लोग अपनी जान गंवा बैठते हैं. वैज्ञानिकों का मानना है कि पैन्क्रियाटिक कैंसर की बीमारी से जूझ रहे लोगों के मौजूदा इलाज के तरीके में कुछ बदलाव कर के मरीजों की जल्दी मौत होने के खतरे को दूर किया जा सकता है. Minnesota के मायो क्लीनिक के डॉक्टर्स और शोधकर्ताओं ने पैन्क्रियाटिक कैंसर से पीड़ित करीब 194 मरीजों का इलाज इस नए तरीके से किया है. इनमें कई मरीज ऐसे थे, जिनके शरीर में कैंसर पूरी तरह से फैल चुका था और उनके बचने का संभावना भी बहुत कम थी.

 

शोधकर्ताओं की टीम ने पाया कि पैन्क्रियाटिक कैंसर से पीड़ित लोगों को सर्जरी से पहले कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी देने से मरीज के जीने की संभावना करीब 5 साल तक बढ़ सकती है. स्टडी के मुख्य शोधकर्ता Dr. Truty ने बताया, पिछले एक दशक में पैन्क्रियाटिक की वजह से कई मौतें हो चुकी हैं. कीमो और रेडिएशन थेरेपी की मदद से कैंसर को नष्ट किया जा सकता है. इसके बाद सर्जरी कर कैंसर की बची हुई कोशिकाओं को शरीर से बाहर निकाला जा सकता है. यह नया इलाज कैंसर के मरीजों के लिए एक आशा की किरण साबित हो सकता है.

 

Dr. Truty ने बताया, ‘हमने पैन्क्रियाटिक कैंसर को सर्जरी से पहले कीमोथेरेपी दी. नतीजों में हमने पाया कि मरीजों को जितनी कीमोथेरेपी दी गई उनकी सेहत में उतना ही सुधार देखने को मिला.’ उन्होंने आगे बताया, ‘जिन मरीजों में कैंसर की कोशिकाएं उनकी धमनियों और नसों तक फैल जाता है, उनकी सर्जरी करना नामुमकिन हो जाता है. इसके साथ ही डैमेज हुई धमनियों को रिपेयर करना भी मुश्किल होता है. शोधकर्ताओं ने बताया कि पैन्क्रियाटिक कैंसर का नया इलाज सिर्फ उन्हीं लोगों पर किया जा सकता है, जिनमें कैंसर की कोशिकाएं दूसरे ऑर्गन तक ना फैली हों. ‘

 

शोधकर्ताओं ने ये भी बताया कि ये थेरेपी मरीजों पर कितनी असरदार होगी, ये इस बात पर निर्भर करता है कि मरीजों के शरीर पर कीमोथेरेपी कितनी असरदार साबित होती है. आंकड़ों की मानें तो हर साल यूके में करीब 10,000 और यूएस में 55,000 लोग पैंक्रिएटिक कैंसर की चपेट में आते हैं. इस स्टडी पर यूके की पैंक्रिएटिक कैंसर की रिसर्च डायरेक्टर Anna Jewell ने बताया, पैन्क्रियाटिक कैंसर से पीड़ित लोगों के इलाज के लिए कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी किस तरह मददगार हो सकती है इसकी सही जानकारी लेने के लिए अभी और स्टडी और रिसर्च की जरूरत है.

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