14th July 2020

जिस खेल को आधा भारत जानता भी नहीं उस खेल में पंकज आडवाणी ने देश को बनाया चैंपियन

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नई दिल्ली. उम्र 34 साल…करियर 12 साल और करियर से लगभग दुगने वर्ल्ड टाइटल. अब बारी आती है नाम की. नाम पंकज आडवाणी (Pankaj Advani). भारत में ये खिलाड़ी, इस खेल में इतना नाम हासिल कर चुका है कि इसे अब स्नूकर और बिलियर्ड्स का पर्याय कहा जाए तो गलत नहीं होगा. आडवाणी से पहले बात बिलियर्ड्स और स्नूकर की. ये खेल क्रिकेट, हॉकी, शतरंज, बॉक्सिंग, फुटबॉल, कबड्डी, टेनिस, बैडमिंटन जैसे तमाम खेलों से कई गुना ज्यादा मंहगा और पहुंच से दूर का खेल माना जाता है. इस खेल को लेकर आम राय है कि ये संपन्न और कुलीन लोगों का खेल है.

सभी मुश्किलों से लड़कर बने चैंपियन- हालांकि भारत जैसे विकासशील देश में अपनी ट्रॉफी और मेडल्स की चमक से लोगों का ध्यान इस खेल की ओर खींचने का काम किया पंकज आडवाणी (Pankaj Advani) ने. जाहिर है संपन्न और कुलीन लोगों का खेल समझे जाने वाले स्नूकर और बिलयर्ड्स में अपने करियर की शुरुआत करना और जिस मुकाम पर आज वो हैं उसे हासिल करना बिलकुल भी आसान नहीं रहा होगा. खुद पंकज बताते हैं कि शुरुआत में जब वह भारत का वर्ल्ड बिलियर्ड्स चैंपियनशिप में प्रतिनिधित्व करने इंग्लैंड गए थे तब उन्हें सरकार की तरफ से कोई फंड मुहैया नहीं कराया गया था. तब उनके खर्चों को उठाने के लिए पंकज की मां ने अपनी एफडी तुड़वाई थी.साल 1992 में पंकज के पिता गुजर गए थे और पंकज ने अपना पहला अतंरराष्ट्रीय इवेंट साल 1999 में खेला. वो बताते हैं कि ये 7-8 साल उनके लिए काफी मुश्किलों में गुजरे. इस समय में उनका साथ दिया उनकी मां ने. फंड की कमी, आर्थिक हालात और ऐसी तमाम चुनौतियों को हरा कर पंकज ने पहली बड़ी जीत हासिल की साल 2003 में. यह पहली बड़ी जीत उन्हें वर्ल्ड चैंपियनशिप में हासिल हुई. ये चैंपियनशिप पंकज का मुकाम नहीं थी, बल्कि ये तो एक नए सफर की शुरुआत मात्र थी.

अंतरराष्ट्रीय खिताबों के बीच स्टेट लेवल खिताब की चमक बेहद कीमती- 24 जुलाई 1985 को पुणे में जन्मे पंकज का ये सफर 16 साल का समय काट चुका है और वो अब तक 23 बार वर्ल्ड टाइटल्स हासिल कर चुके हैं. पंकज स्नूकर के लंबे और छोटे फॉर्मेट में 8 विश्व खिताब और टाइम और पॉइंट्स दोनों फॉर्मेट में इंग्लिश बिलियर्ड्स का खिताब जीतने वाले दुनिया के एकमात्र खिलाड़ी हैं. पंकज के पास खिताब और ट्रॉफी इतनी हैं कि उनकी चमक में इंसान बार-बार गिनती भूल जाए. हालांकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जीती गई इन ट्रॉफीज में से एक ट्रॉफी स्टेट लेवल खिताब की भी है. स्टेट लेवल चैंपियन का ये खिताब इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये खिताब पंकज का पहला खिताब है और यहीं से एक चैंपियन के आगाज की कहानी भी शुरू होती है. वैसे इस कहानी में एक और खास बात है, वह है कि पंकज ने 12 साल की उम्र में ये खिताब अपने भाई को हराकर अपने नाम किया था. बस ये सफर शुरू हुआ तो साल 2000, 2002, 2003 में इंडियन जूनियर्स बिलियर्ड्स चैंपियनशिप से होते हुए 2003 में नेशनल स्नूकर चैंपियनशिप के सबसे युवा खिलाड़ी बनने तक पहुंचा. इसी साल उन्होंने वर्ल्ड अमेच्योर स्नूकर चैंपियनशिप अपने नाम की. अपनी छोटी उम्र को कहीं भी रोड़ा न बनने देते हुए वह लगातार सीनियर खिलाड़ियों को चुनौती दे रहे थे. आखिर साल 2005 में पंकज ने आईबीएसएफ वर्ल्ड चैंपियनशिप (IBSF World Championship) का खिताब जीत कर भारत का दबदबा इस खेल में कायम किया. वह ऐसा करने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी थे. इसके बाद तो उन्होंने वर्ल्ड, एशियन और इंडियन चैंपियनशिप के खिताबों की हैट्रिक लगा दी.

कुलीन वर्ग का माना जाने वाला खेल पंकज की बदौलत आम लोगों तक पहुंचा- जिस खेल के लिए पंकज ने इतना संघर्ष किया आज वो खेल उनके नाम के साथ जुड़ गया है. करियर के शुरुआती दौर में जब एयरपोर्ट्स पर इमिग्रेशन अधिकारी उन्हें अक्सर रोक कर उनके खेल के बारे पूछते थे, वही लोग आज उनके साथ फोटो खिंचवाते हैं. हालांकि पंकज (Pankaj Advani) अपने संघर्ष को भूले नहीं हैं और इसलिए वो इस खेल तक लोगों की पहुंच का रास्ता आसान बनाने की मुहिम पर जुटे हुए हैं. उन्होंने दुनियाभर में फैले अपने फैंस को खेल से जुड़ने और इससे जुड़े नियम और तकनीक सिखाने के लिए एक एप बनाया है.

पंकज (Pankaj Advani) का कहना है कि जब उनके पास समय होगा तब वह कोचिंग क्लीनिक माध्यम से बाहर जाकर युवाओं की मदद करेंगे. वहीं भारत में इस खेल को हर व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए पंकज ने बेंगलुरु (Bengaluru) में अपनी एकेडमी शुरू की है. वहीं बेंगलुरु, मुंबई सहित देश के कई अन्य शहरों के स्कूलों को बिलियर्ड्स टेबल देने की योजना भी बनाई है. पंकज राज्य सरकारों और प्रशासन के साथ मिलकर कई स्टेट, नेशनल और इंटरनेशनल टूर्नामेंट्स का भी आयोजन करवा चुके हैं, जहां महिला और पुरुष दोनों वर्ग को सम्मानजनक इनाम राशिम मिलती है. भारत में स्नूकर और बिलियर्ड्स का ये पोस्टर बॉय अब लगातार कुलीन और संपन्न वर्ग के समझे जाने वाले इस खेल को आम लोगों तक पहुंचा रहा है.

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