Tue. Jul 16th, 2019

19 सालों के अंदर अटल-मोदी सरकार ने बदल डाली बजट की कई पुरानी परंपराएं

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आम बजट एक ऐसा शब्द जिसे सुनकर समाज का हर तबका अपनी नजरें इसपर गड़ाकर बैठा रहता है। लोगों को बजट से अपने किचन से लेकर कार्यस्थल तक हर जगह सरकार के फैसले के साथ अपने आप को चलाने उससे अपने आप को संवारने उससे अपने आपको जोड़कर देखने का मौका मिलता है। लेकिन पिछले 19 सालों में देश ने अपने बजट में काफी ऐसे बदलाव किए जिसे आप भी नहीं जानते होंगे। पहले रेल और वित्त बजट(आम बजट) अलग-अलग पेश किया जाता था लेकिन पिछली सरकार में रेल बजट को आम बजट का हिस्सा बना दिया गया। आपको जानकर हैरानी होगी कि भारतीय यूनियन बजट पहली बार 1947 में नहीं बल्कि उससे 87 साल पहले ईस्ट इंडिया कंपनी लेकर आई थी। इस बजट को 18 फरवरी 1869 को जेम्स विल्सन ने पेश किया था। जबकि स्वतंत्र भारत का पहला बजट 26 नवंबर 1947 को आरके शनमुघम चेट्टी ने पेश किया था। यह बजट मात्र साढ़े सात महीने के लिए था। भारत के विभाजन के कारण व्यापक दंगों के बीच पहला केंद्रीय बजट पेश किया गया था। जिसके बाद अगला बजट 1 अप्रैल, 1948 से लागू होना था। इस पहले बजट का 92.74 करोड़ रुपए यानी 46% सिर्फ रक्षा सेवाओं पर खर्च किया गया था। हालांकि तब से लेकर स्वतंत्र भारत के अबतक पेश किए गए बजटों में काफी सारे बदलाव आए। आपको जानकर हैरानी होगी कि 29 फरवरी 1964 को मोरारजी देसाई ने अपने जन्मदिन पर बजट आम बजट पेश किया था जबकि बजट पेश का समय मार्च में होता था।

इस बार भी कुछ ऐसा हुआ जिसे जानकर आपको हैरानी होगी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट की वर्षों पुरानी परिपाटी को बदलते हुए बजट दस्तावेज लाने के लिए ब्रीफकेस की जगह इस बार लाल रंग के कपड़े के बैग का इस्तेमाल किया। वित्त मंत्रालय में अधिकारियों के साथ भेंट के दौरान निर्मला सीतारमण अपने हाथ में बेहद खूबसूरत दिख रहे बही खाते के थैले को थामें थी, जिसमें बजट दस्तावेज था। खास बात ये थी कि इस बार उन्होंने पिछले वित्त मंत्रियों की तरह चमड़े के ब्रीफकेस का इस्तेमाल नहीं किया, बल्कि बजट दस्तावेज को लाल रंग के कपड़े में लपेट कर लेकर आईं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा बजट दस्तावेज को ब्रीफकेस की जगह लाल कपड़े में रखने के बारे में बताया गया कि, ‘ये भारतीय परंपरा है। ये पश्चिमी विचारों की गुलामी से हमारी मुक्ति का प्रतीक है। ये एक बजट नहीं, बल्कि बही खाता है।’

 

‘ब्रीफकेस’ से बही खाते तक कैसा रहा है बजट का इतिहास- साल 1733 में ब्रिटिश प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री रॉबर्ट वॉलपोल ‘बजट’ पर लेदर बैग के साथ संसद आए थे। चमड़े के बैग को फ्रेंच भाषा में बुजेट कहा जाता है, इसीलिए इस परंपरा को बजट कहा जाने लगा। बजट ब्रीफकेस का आकार तो लगभग एक जैसा ही रहा, लेकिन रंग में कई बार बदलाव आया। अंग्रेजों ने इस परंपरा को भारत में भी बढ़ाया जो पिछले अंतरिम बजट तक जारी रहा।Budget ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि संसद में बजट वाले दिन थैला या ब्रीफकेस लाने की परंपरा भी अंग्रेजों की ही देन है। आजादी के बाद देश के पहले वित्त मंत्री आरके शानमुखम चेट्टी ने जब 26 जनवरी 1947 को पहली बार बजट पेश किया तो भी वह एक लेदर के थैले के साथ संसद में उपस्थित हुए थे। कई सालों तक देश के तमाम वित्तमंत्री इसी तरह के थैले के साथ संसद में दस्तक देते रहे। पूर्व प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री मनमोहन सिंह पहली बार संसद में ब्रीफकेस लेकर पहुंचे थे। अटल बिहारी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार में वित्तमंत्री रहे यशवंत सिन्हा भी संसद में ब्रीफकेस लेकर आए थे। इसके बाद पी चिदंबरम, प्रणब मुखर्जी, अरुण जेटली और पीयूष गोयल भी बजट वाले दिन ब्रीफकेस के साथ संसद पहुंचे थे।

भारत में बजट और वित्त मंत्री के रेड सूटकेस के बीच का रिश्ता दिलचस्प है। यह रिश्ता सन 1860 में बना। बताया जाता है कि 1860 में ब्रिटेन के ‘चांसलर ऑफ दी एक्‍सचेकर चीफ’ विलियम एवर्ट ग्‍लैडस्‍टन फाइनेंशियल पेपर्स के बंडल को लेदर बैग में लेकर आए थे। तभी से यह परंपरा निकल पड़ी। ब्रिटेन का रेड ग्लैडस्टन बजट बॉक्स साल 2010 तक प्रचलन में था।

जानिए अटल बिहारी से लेकर नरेंद्र मोदी तक एनडीए सरकार ने बजट को लेकर क्या बदलाव किए?

बजट पेश करने का वक्त बदला- साल 2000 तक केंद्रीय बजट शाम 5 बजे पेश किया जाता था। ये परंपरा अंग्रेजों के समय से चली आ रही थी, लेकिन साल 2001 में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार में वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने सुबह 11 बजे बजट पेश कर नई परंपरा शुरू की।

 

बजट पेश करने की तारीख बदली- पहले बजट फरवरी के आखिरी वर्किंग डे के दिन पेश होता था, लेकिन मोदी सरकार अब बजट को फरवरी के पहले वर्किंग डे के दिन पेश करती हैं।

अब आम बजट में ही पेश होता है रेल बजट- साल 2016 तक केंद्रीय बजट से कुछ दिन पहले रेल बजट पेश किया जाता था। साल 2017 में रेल बजट को केंद्रीय बजट के साथ ही पेश किया गया। ऐसा होने से पिछली 92 साल की पुरानी परंपरा बदल गई और रेल बजट और आम बजट एक साथ पेश होने लगा।

अब जानें अब तक बजट पेश करनेवाले किन वित्त मंत्रियों के नाम क्या है रिकॉर्ड
शब्द के हिसाब से सबसे लंबा बजट भाषण मनमोहन सिंह ने 1991 में दिया था। भाषण में 18,177 शब्द थे। अरुण जेटली दूसरे, तीसरे, चौथे और पांचवें नंबर पर हैं। उनका 2017 में बजट भाषण 18604 शब्दों का था। वहीं 2015 में जेटली का बजट भाषण 18122 शब्दों, 2018 में 17991 शब्दों और 2014 में 16528 शब्दों का था। सबसे ज्‍यादा देर तक बजट भाषण का रिकॉर्ड जसवंत सिंह के नाम है। उन्होंने 2003 में अपना बजट पेश करने के लिए 2 घंटे 13 मिनट का समय लिया। 1977 में हिरूभाई एम पटेल ने अंतरिम बजट पेश करते हुए 800 शब्दों का सबसे छोटा बजट भाषण दिया था। मोरारजी देसाई ने सबसे ज्यादा 10 बार बजट पेश किया है। उनके बाद पी चिदंबरम हैं, जिन्होंने 9 बार बजट पेश किए हैं। 28 फरवरी 1973 को वाईबी चह्वाण ने बजट पेश किया, जिसे 550 करोड़ रुपये के बजट घाटे के कारण ‘काला बजट’ कहा जाने लगा।जवाहरलाल लाल नेहरू, इंदिरा गांधी और उनके बेटे राजीव गांधी ने प्रधानमंत्री के रूप में बजट पेश किया।

1970 में इंदिरा गांधी बजट पेश करने वाली पहली महिला वित्त मंत्री बनीं। लेकिन पीएम होने के अलावा उनके पास यह एक पोर्टफोलियो था।आर वेंकटरमन और प्रणब मुखर्जी केवल दो वित्त मंत्री थे, जो भारत के राष्ट्रपति बने। सीडी देशमुख भारतीय रिजर्व बैंक के पहले भारतीय गवर्नर थे जो बाद में वित्त मंत्री बने और 1951 में अपना पहला बजट पेश किया। हालांकि बाद में मनमोहन सिंह भी भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर रहने के बाद भारत के वित्त मंत्री बने और उन्होंने संसद में बजट पेश किया।
अब जानें भारत के बजट के बारे में खास
देश का पहला बजट 1947 नहीं बल्कि उससे 87 साल पहले ईस्ट इंडिया कंपनी लेकर आई थी। भारतीय मंत्री नहीं बल्कि वायसराय को सलाह देने के लिए गठित इंडिया काउंसिल मशहूर अर्थशास्त्री जेम्स विलियन ने देश के लिए पहला बजट पेश किया था। साल 2019-20 तक आजाद भारत में 89 बजट पेश किए गए। 26 वित्त मंत्रियों ने इन तमाम बजटों को पेश किया।

कई वित्त मंत्री अपनी क्षमताओं के बूते देश के प्रधानमंत्री के पद पर बैठे। इनमें चरण सिंह, इंद्र कुमार गुजराल, मनमोहन सिंह, वीपी सिंह और मोरारजी देसाई हैं। देश के 26 में से 11 वित्त मंत्री ऐसे रहे, जिनके पास कानून की डिग्री रही। 2 वित्त मंत्री ऐसे रहे जिन्हें देश का प्रथम नागरिक होने का गौरव हासिल हुआ। प्रणब मुखर्जी और आर वेंकटरमन ऐसे दो वित्त मंत्री रहे। आजादी के बाद कई बजट ऐसे रहे जिन्हें अलग-अलग नाम दिए गए। इनमें 1973 का काला बजट, 1997 का ड्रीम बजट और 2002 का रोल बैक बजट शामिल है।

49 साल पहले इंदिरा गांधी ने पेश किया था बजट, निर्मला सीतारमण दूसरी महिला
करीब आधी सदी के बाद दूसरी बार आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करने वाली महिला ने इस बार संसद में बजट पेश किया। 5 जुलाई 2019 यानी शुक्रवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने केंद्रीय बजट पेश किया। इससे ठीक 49 साल पहले 28 फरवरी 1970 में प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री इंदिरा गांधी ने केंद्रीय बजट पेश किया था। हैरान करने वाली बात है कि जो महिलाएं घर का बजट संभालती हैं उन्हें ये मौका इतने सालों के बाद मिला। लेकिन 49 साल पहले इंदिरा गांधी ने जो बजट पेश किया था उसमें दो पार्ट थे। पहले पार्ट में 17 और दूसरे पार्ट में 38 बिंदु थे। इंदिरा गांधी ने अपने 15 पेज के बजट में देश को तब काफी कुछ दिया था।

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