Tue. May 21st, 2019

चुनाव आयोग की ‘डिजिटल खुफिया सेना’ करेगी जमीन से आसमान तक की निगरानी

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चंडीगढ़। चुनाव आयोग ने सोशल मीडिया के मार्फ़त ‘डिजिटल ख़ुफ़िया सेना’ का विस्तार और तेज कर दिया है। आयोग ने ‘सी-विजिल’ मोबाइल एप को लॉन्च करने के बाद इसे उपभोक्ता के स्मार्ट-फ़ोन पर डाउनलोड करवाने का अभियान शुरू किया है। इस एप के जरिए कोई भी नागरिक चुनावों में आचार संहिता की हो रही अवहेलना की फोटो एवं वीडियो चुनाव आयोग को भेज सकेगा और 100 मिनट में आयोग इस पर करवाई भी करेगा। चूंकि पंजाब देशभर में स्मार्ट-फोन की संख्या में तीसरे नंबर पर आता है और उत्तर भारत में शीर्ष पर, इसलिए आयोग इस एप के लिए सक्रिय है। पंजाब चुनाव आयोग के चंडीगढ़ कार्यालय में 13 मार्च को अधिकारियों की बैठक में ‘सी-विजिल’ मोबाइल एप के बारे में विस्तृत जानकारी दी गयी थी। आयोग इस एप को गेम-चेंजर के रूप में देख रहा है। इस एप को डाउनलोड करने के बाद ही व्यक्ति आयोग से जुड़ जाएगा।

 

‘सी-विजिल’ मोबाइल एप का ट्रायल वर्ष 2018 में हुए पांच राज्यों मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, तेलंगाना और मिजोरम के विधानसभा चुनावों में किया गया था। इन चुनावों में इस एप के मार्फ़त करीब 28 हजार शिकायतें चुनाव आचार सहिंता की अवहेलना की आई थीं और उनका तयशुदा समय में समाधान किया गया था। चुनाव आयोग के सूत्रों के अनुसार, इन शिकायतों में 75 प्रतिशत शिकायतें ठीक पाई गई थीं। पंजाब में भी इस एप के प्रति लोगों का रुझान देखा जा रहा है।राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी डॉ. एस. करुणा राजू ने हिन्दुस्थान समाचार को बताया कि इस एप के माध्यम से लोग चुनावों में हो रहे नियमों के उल्लंघन से जुड़ी फोटो अथवा वीडियो को बिना आयोग के कार्यालय में जाए, सिर्फ अपने स्मार्टफोन के द्वारा भेज सकते हैं। आयोग 100 मिनट में इस शिकायत पर करवाई करेगा।

 

अभी तक चुनाव आचार सहिंता के उल्लंघन की शिकायतों का माध्यम भौतिक पत्र/शिकायत के रूप में था। इन शिकायतों के समाधान में भी वक्त लगता था। इस प्रक्रिया के चलते कई बार साधारण मतदाता शिकायत करने से गुरेज भी कर जाते थे। हालांकि चुनाव आयोग ने चुनावों में सोशल मीडिया पर सख्ती से नज़र रखे हुए है, लेकिन आयोग अपनी नैया भी सोशल मीडिया के मार्फ़त ही पार लगाने के इरादे में है। भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) द्वारा गुजरे वर्ष में जारी मोबाइल यूजर्स डाटा के अनुसार देश में 120 करोड़ से अधिक मोबाइल उपभोक्ता हैं। इनमें इंटरनेट का इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ताओं की संख्या 54 प्रतिशत है। साइबर मीडिया रिसर्च डाटा के अनुसार, जनवरी 2018 तक केरल में स्मार्टफोन इस्तेमाल करने वाले 65 प्रतिशत उपभोक्ता देशभर में सर्वाधिक थे, 60 प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर गुजरात और तीसरे स्थान पर पंजाब था। इसमें 59 प्रतिशत उपभोक्ताओं के पास इंटरनेट फ़ोन थे।

 

मुख्य चुनाव अधिकारी राजू के अनुसार, राजनीतिक तौर पर इसका दुरुपयोग न हो, इसके लिए मोबाइल एप पहले से ही रिकॉर्डेड वीडियो को नहीं लेता और एक बार वीडियो अथवा फोटो को रिकॉर्ड करने के बाद शिकायतकर्ता को घटना की रिपोर्ट के लिए पांच मिनट का समय दिया जाता है। आयोग के लोगों का मानना है कि इस एप से न सिर्फ चुनावों में आचार सहिंता की अवहेलना के मामले कम होंगे, बल्कि देश के साधारण लोग भी चुनाव-व्यवस्था में सक्रिय भूमिका अदा करेंगे।

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