13th July 2020

कोविड-19 महामारी में जालसाज ढूंढ रहे आपका डेटा चुराने का मौका, एक्सपर्ट ने बताया कैसे हो सकती है गलती और बचने के उपाय

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कोविड महामारी से पूरी दुनिया प्रभावित हुई है। ये महामारी लगातार अपने पैर फैला रही है, जिसकी वजह से कई फैक्ट्रियां और बिजेसन बुरा तरह प्रभावित हुए हैं। हालांकि, इस बीच कई लोग और ऑर्गनाइजेशन लोगों की मदद के लिए आगे आई हैं। वहीं, लोग भी इस महामारी से लड़ाई के लिए पैसा दान कर रहे हैं। ऐसे में हैकर्स, रोबोकॉलर्स और कुछ अन्य लोगों के लिए पैसा चुराने के अवसर पैदा हो गए हैं। जालसाज महामारी के समय लोगों को निशाना बनाने का अवसर ढूंढ रहे हैं। महामारी के चलते लाखों लोग बेरोजगार हुए हैं। ऐसे में जब उनकी मदद के लिए जालसाज का बैंक या सरकारी अधिकारी बनकर फोन या ईमेल आता है, तब उसे नजरअंदाज करना मुश्किल हो जाता है। दूसरी तरफ, जो लोग वर्क फ्रॉम होम कर रहे हैं, उनके पर्सनल टेक डिवाइसेज में ये सेंध लगाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, इस तरह की एक्टिविटी के बारे में बहुत कम आंकड़े हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि मेल के इनबॉक्स, फोन कॉल और वेबसाइटों पर जालसाजों द्वारा हमला करने के स्कैम में बढ़ोतरी हुई है। पिछले महीने, फेडरल ट्रेड कमीशन ने वार्निंग जारी की थी, जिसमें लोगों को सरकारी योजनाओं के की जानकारी को लेकर डिजिटल कम्युनिकेशन नहीं करने की सहाल दी गई। नेक्स्ट कॉलर के एक एग्जीक्यूटिव सैम एस्पिनोसा ने कहा, “यह अवसरों का पेंडोरा बॉक्स है, जिसका वे लाभ उठा सकते हैं। जब आप बेरोजगारी से जूझ रहे होंगे, तो आपके पास यह सोचने का समय नहीं होगा कि यह एक धोखेबाज है।”नेक्स्ट कॉलर द्वारा पिछले सप्ताह हुए एक सर्वे में 37 फीसदी लोगों ने कहा कि उन्हें पिछले महीने कोरोनोवायरस से संबंधित धोखाधड़ी और घोटाले के 32 प्रतिशत फोन आए। वहीं, 44 प्रतिशत ने कहा कि अब वे वर्क फ्रॉम होम के दौरान धोखाधड़ी को लेकर असुरक्षित महसूस करते हैं। ऐसे में सिक्योरिटी एक्सपर्ट उन प्रमुख स्कैम और उनसे बचने की गाइड बता रहे हैं, जो आपके काम आ सकती है।
1. फेक वेबसाइट
जालसाज फर्जी वेबसाइट बनाकर लोगों की प्राइवेट जानकारी हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं। कई जालसाजों ने ऑफिशियल सरकारी वेबसाइट के जैसी दिखने वाली वेबसाइट बना ली हैं। इन वेबसाइट में कोविड-19 की जानकारी होती है। यहां पर आपकी पर्सनल जानकारी वाले विज्ञापन भी दिखाए जाते हैं। ठीक इसी तरह, कई वेबसाइट फेस मास्क, हैंड सैनिटाइजर और सफाई से जुड़े दूसरे प्रोडक्ट बेचने का दिखावा करती है और इस बहाने आपके क्रेडिट कार्ड की जानकारी जुटा लेती हैं।सिक्योरिटी फर्म ADT साइबरस्पेस में टेक्नोलॉजी और सॉल्यूशन के डायरेक्टर रॉन कल्लर ने कहा, “साइट और स्टोर की संख्या सभी जगहों पर बढ़ गई है।” उन्होंने कहा सरकार द्वारा प्रोत्साहन चेक जारी करने के कुछ समय बाद स्कैमर्स ने 15,000 फर्जी वेबसाइटों रजिस्टर्ड की, जिससे लोगों की पर्सनल और फाइनेंशियल डिटेल चुराई जा सके।
फेक वेबसाइट से बचने के उपाय
वेबसाइट का URL चेक करें। एक फेक वेबसाइट, किसी सरकारी या बैंकिंग वेबसाइट के समान दिख सकती है, लेकिन एड्रेस बार में डोमेन नेम नकली हो सकता है। आप एड्रेस बार पर क्लिक करें और डोमेन के आखिरी में “.com” या “.org” की बजाय “com.co,” “.ma” या “.co” पर ध्यान दें। एक ऐड ब्लॉकर को इन्स्टॉल करें। ब्राउजर को आपकी व्यक्तिगत जानकारी मांगने वाले शेडो विज्ञापन को लोड करने से रोकने के लिए ऐड-ब्लॉकिंग एक्सटेंशन डाउनलोड करें। कमप्यूटर ब्राउजिंक के लिए uBlock ऑरिजिन बेहतर है। वहीं, आईफोन के लिए 1Blocker X बेहतर है।
2. स्कैम कॉल्स
रोबोकॉल एक फोन कॉल है जो एक पूर्व-रिकॉर्ड किए गए संदेश को देने के लिए एक कम्प्यूटरीकृत ऑटोडियलर का उपयोग करता है। रोबोकॉल अक्सर राजनीतिक और टेलीमार्केटिंग फोन अभियानों से जुड़े होते हैं, लेकिन इन्हें सार्वजनिक-सेवा या आपातकालीन घोषणाओं के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है। ऐसे कॉल की मदद से लोगों की पर्सनल डिटेल चुराई जाने का खतरा है। ज्यादातर मामलों में दो स्कैमर एक साथ काम करते हैं। पहला फोन पर आपके बैंक के साथ होता है, वहीं दूसरा फोन पर आपके साथ होता है। ये आपसे व्यक्तिगत जानकारी मांगता है, ताकि वे तुरंत आपके खाते तक पहुंच पाएं। इस तरह से वे बैंक एजेंट को भी आसानी से धोखा दे देते हैं। इस बारे में मिस्टर एस्पिनोसा ने कहा, “इस तरह के कॉल से वे सिस्टम की दरार दो ढूंढते हैं।” महामारी के बाद से वित्तीय संस्थानों के लिए हाई-रिस्क वाले कॉल की संख्या में 50 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने कहा कि एक बैंक को प्रति घंटे 6,000 अधिक जोखिम वाले कॉल मिल रहे हैं।
स्कैम कॉल्स से बचने के उपाय
फोन को काटें और फिर से कॉल करें। रोबोकॉलर्स सालों से आ रहे हैं। ऐसे में बिजनेस और संगठनों को ऐसे कॉल से सावधान रहना चाहिए। उदाहरण के लिए, आपका बैंक हमेशा धोखाधड़ी देने वाले कॉल का अलर्ट करता है। साथ ही, वो इस बात को भी बताता है कि बैंक कभी आपसे क्रेडिट कार्ड के पीछे का ग्राहक सेवा नंबर या दूसरी डिटेल नहीं मांगता। यदि कोई मांगता भी है तो उसे बताएं नहीं। अपनी ऐड्रेस बुक से बिजनिसेज को हटाएं। कई बार सेव एंट्री हमें इस बात का विश्वास दिलाती हैं कि ये कॉल सही है। मान लीजिए कि आपकी ऐड्रेस बुक में सिटीबैंक सपोर्ट नंबर सेव है और इसे ‘सिटी बैंक’ का लेबल दिया है। ऐसे में यदि किसी जालसाज ने सिटीबैंक सपोर्ट नंबर को हैक कर लिया है, तो आपके फोन में कॉल आने पर पहले से सेव नंबर दिखेगा। ऐसे में आप धोखाधड़ी का शिकार हो सकते हैं।
3. ईमेल और टेक्स्ट मैसेज
फिशिंग, जिसमें एक स्कैमर आपकी व्यक्तिगत जानकारी मांगते हैं। ये इंटरनेट के सबसे पुराने स्कैन में से एक है, लेकिन आज भी इसका इस्तेमाल किया जाता है, क्योंकि ये काम करता है। जालसाजों ने महामारी के दौरान एक बार फिर इसे अपना लिया है। एडीटी के अनुसार, विश्व स्वास्थ्य संगठन, रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र द्वारा ईमेल और टेक्स्ट मैसेज पर कई तरह की जानकारी दे रहे हैं। दरअसल, जालसाजों द्वारा जो ईमेल या टेक्स्ट मैसेज किए जाए हैं उनमें इस बात का जिक्र होता है आपको वित्तीय मदद कैसे मिल सकती है, जिसके लिंक भी दिए होते हैं। वास्तव में इन लिंक में मैलवेयर होते हैं, जो आपके फोन या पीसी की सारी डिटेल चुरा लेते हैं।
ईमेल और टेक्स्ट मैसेज से बचने के उपाय
ईमेल और टेक्स्ट मैसेज भेजने वाले की जांच करें। धोखाधड़ी वाले ईमेल सही लगते हैं, लेकिन ये फर्जी वेबसाइटों के समान ही होते हैं। इनके कैरेक्टर में अंतर हो सकता है। ठीक इसी तरह, फर्जी टेक्स्ट मैसेज में 10 से अधिक अंकों वाला फोन नंबर होता है। ऐसे में जिन ईमेल या टेक्स्ट मैसेज पर शंका है, उन पर क्लिक ना करें। अननॉन सेंडर से आए मेल पर एकदम से क्लिक नहीं करें। पहले उसे नीच स्कॉल करके पढ़ें और समझें। अक्सर इस तरह के मेल में जालसाज यूजर के क्लिक करवाना चाहते हैं। इस तरह के मेल को तुरंत डिलीट कर देना चाहिए। ऐसे ज्यादातर मेल स्पैम में आते हैं।
4. आपका घर बना ऑफिस
मिस्टर कूलर कहते हैं कि कोरोनावायस महामारी की वजह से लाखों कर्मचारियों घर से काम कर रहे हैं। यानी अब उनका घर ऑफिस में बदल चुका है। ऐसे में जब हैकर्स आपके प्राइवेट अकाउंट और होम नेटवर्क पर सेंध लगाने की कोशिश कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि डेटा का सेफ्टी अब कर्मचारी के हाथ में है।
बचने के उपाय
अपने नेटवर्क सिक्योरिटी की जांच करें। कम्प्यूटर के ऑपरेटिंग सिस्टम की तरह वाई-फाई राउटर को के सॉफ्टवेयर को भी अपडेट करें। राउटर की सेटिंग्स में लॉगइन करके इस बात की पुष्टि करें कि क्या यह उसके सिस्टम में मौजूद फर्मवेयर या सॉफ्टवेयर का लेटेस्ट अपडेट है। यदि आपका राउटर सात साल से ज्यादा पुराना है, तो उसे सेफ्टी अपडेट नहीं मिलेंगे। ऐसे में एक नया राउटर खरीद लें। इसके लिए मॉर्डन वाई-फाई सिस्टम, जैसे कि अमेजन के ईरो या गूगल वाईफाई की बेहतर हैं। अपने राउटर के पासवर्ड को स्ट्रांग करें। इसके लिए कैपिटल और स्मॉल अल्फाबेट के साथ न्यूमेरिकल, स्पेशल कैरेक्ट भी यूज करें। कंपनी द्वारा दिए किए गए डिवाइसेज, इंटरनेट अकाउंट और सॉफ्टवेयर पर काम करना सबसे अच्छा है। यदि आपके पास काम के लिए जरूरी टेक्नीकल डिवाइसेज की कमी है, तो अपने ऑफिस के आईटी डिपार्टमेंट में बताएं।

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