Tue. Jul 16th, 2019

प्रधानमंत्री मोदी की दूसरी पारी, सरकार के सामने ये होंगी चुनौतियां

  •   
  •  
  •  
  •  
  •   
  •  
  •  

आम चुनावों के नतीजे घोषित होने के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को 303 सीटें मिलीं हैं। भाजपा अकेले ही बहुमत के आंकड़े को पार कर गई है। अब नरेंद्र मोदी-2 की शुरुआत होने जा रही है। 30 मई को नरेंद्र दामोदर दास मोदी एक बार फिर से बिमस्टेक (पाकिस्तान और चीन को छोड़कर लगभग सभी पड़ोसी देशों के नेताओं) की उपस्थिति में अपने दूसरे कार्यकाल के लिए प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे। दूसरे कार्यकाल में उन्हें अपनी ही सरकार द्वारा छोड़े गए कई अनसुलझे मुद्दे विरासत में मिले हैं। उसमें किसानों की समस्याएं, बेरोजगारी की समस्या, अर्थव्यवस्था की खामियों से निपटना, अंतर्राष्ट्रीय संबंध और सामाजिक समरसता कायम रखने की समस्याओं से जूझना पड़ेगा और उन समस्याओं से निपटने के लिए तत्काल कार्रवाई करनी होगी, क्योंकि अबकी बार सरकार के लिए कोई हनीमून पीरियड नहीं होगा।

 

बेरोजगारी की समस्या से निपटना- जनवरी में सीएमआईई द्वारा जारी की गई रिपोर्ट में कहा गया कि 2016 के नोटबंदी और 2017 के जीएसटी रोलआउट के साइड इफेक्ट से 2018 में लगभग 1.1 करोड़ नौकरियां खत्म हो गईं। 2017-18 में बेरोजगारी 45 साल के उच्च स्तर पर थी। औसत बेरोजगारी दर 6.1 प्रतिशत रही। इसे नोटबंदी और जीएसटी के बेतरतीब रोलआउट का असर माना गया। नई मोदी सरकार को अविलंब रोजगार के अवसर पैदा करने होंगे।

 

अर्थव्यवस्था की खामियों को दूर करना- मोदी सरकार उच्च जीडीपी विकास दर रखने में सक्षम रही है, जो दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक बन गई है। लेकिन विकास संकेतक गहरी समस्याओं की ओर इशारा करते हैं। कम मुद्रास्फीति के बावजूद निजी खपत और निवेश धीमा हो गया है। ऑटोमोबाइल बिक्री, रेल माल, घरेलू हवाई यातायात, पेट्रोलियम उत्पाद की खपत और आयात के आंकड़े खपत में मंदी का संकेत दे रहे हैं। वर्तमान आर्थिक स्थिति से निपटना मोदी सरकार के लिए बड़ी चुनौती होगी।

 

किसानों की समस्याओं से निपटना- देश में कुल कार्यबल का लगभग 55 प्रतिशत हिस्सा कृषि में लगा हुआ है। एक अनुमान के मुताबिक लगभग 26 करोड़ लोग कृषि कार्य में लगे हुए हैं। जिनके ऊपर देश की लगभग 55-57 प्रतिशत आबादी निर्भर है। यह काफी समय से संकट में है। इसे नजरअंदाज करके चलना सरकार के लिए एक चुनौती होगी। खाद्य की कीमतों में गिरावट से कृषि संकट पैदा हुआ है। सरकार के एमएसपी बढ़ाने के बावजूद भी किसानों को उनके उत्पाद के सही दाम नहीं मिल पा रहे हैं। नई सरकार को कृषि श्रमिकों को अन्य रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना एक बड़ी चुनौती होगी।

 

सामाजिक समरसता कायम रखना- मोदी सरकार की शानदार चुनावी जीत के बाद, रिपोर्ट्स की मानें, तो अल्पसंख्यकों, खासकर मुसलमानों के एक वर्ग के बीच एक बेचैनी है। देश के कुछ हिस्सों में कुछ ऐसी घटनाएं हुई हैं, जिनसे प्रचलित भावनाओं में इजाफा हो सकता है। पीएम मोदी ने अपने संबोधन में सत्तारूढ़ डिस्पेंसरी के नवनिर्वाचित सांसदों को कहा कि अगले पांच वर्षों में, उन्हें ‘सबका साथ, ‘सबका विकास’, सबका विश्वास और सामूहिक प्रयास सुनिश्चित करना होगा।

 

अंतर्राष्ट्रीय संबंधों को गति देना- भारत के पाकिस्तान के साथ संबंध स्थापित करने का कूटनीति का सरल मामला नहीं है। इसमें कश्मीर के मुद्दे और धार्मिक सद्भाव के सवाल सहित कई अन्य पहलू भी शामिल हैं। ये मुद्दे काफी अहम हैं। सरकार को इस पर काम करना पड़ेगा, क्योंकि देश की जनता ने उन्हें दोबारा मौका दिया है। इसलिए उसकी अपेक्षायें काफी बढ़ेंगी।

Visitor Hit Counter

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

loading...