10th April 2020

बायजू ऐप के फाउंडर रवींद्रन देश के नए अरबपति बने, 8 साल पहले टीचर थे

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बेंगलुरु. ऑनलाइन एजुकेशन ऐप बायजू (BYJU)के फाउंडर और सीईओ बायजू रवींद्रन (37) देश के नए अरबपति बन गए हैं। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक रवींद्रन की कंपनी थिंक एंड लर्न ने इस महीने 15 करोड़ डॉलर (1,035 करोड़ रुपए) की फंडिंग जुटाई थी। इससे कंपनी का वैल्यूएशन 5.7 अरब डॉलर (39,330 करोड़ रुपए) हो गया। रवींद्रन के पास कंपनी के 21% से ज्यादा शेयर हैं। टीचर रहे रवींद्रन ने 2011 में थिंक एंड लर्न की स्थापना की थी। 2015 में प्रमुख लर्निंग ऐप बायजू लॉन्च किया था।

रवींद्रन फैमिली के पास बायजू के 35% शेयर- बायजू के 3.5 करोड़ सब्सक्राइबर हैं। इनमें से 24 लाख पेड यूजर हैं जो सालाना 10 हजार से 12 हजार रुपए तक फीस चुकाते हैं। इस साल मार्च तक बायजू मुनाफे में आ गई थी। इसी दौरान रवींद्रन ने पेंशन फंड और सॉवरेन वेल्थ फंड जैसे लंबी अवधि वाले निवेशकों को आकर्षित करना शुरू कर दिया। हाल ही में कतर इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी ने उनकी कंपनी में पैसा लगाया है। अपनी हिस्सेदारी बरकरार रखने के लिए बायजू के पिछले फंडिंग राउंड में रवींद्रन ने खुद भी शेयर खरीदे थे। ब्लूमबर्ग के सूत्रों के मुताबिक रवींद्रन, पत्नी और भाई के पास बायजू के करीब 35% शेयर हैं।
रवींद्रन ने एक बार कहा था कि वे देश की शिक्षा व्यवस्था के लिए ऐसा काम करना चाहते हैं जो माउस हाउस (डिज्नी) ने मनोरंजन के लिए किया है। उन्होंने अपने नए लर्निंग ऐप में डिज्नी के सिंबा और अन्ना कैरेक्टर को भी शामिल किया है।

रवींद्रन ने कहा था कि ऐप के जरिए बच्चे सीखना शुरू करें उससे पहले सिंबा उन्हें आकर्षित करेगा। सस्ते स्मार्टफोन और इंटरनेट प्लान की उपलब्धता की वजह से देश में ऑनलाइन लर्निंग की ग्रोथ बढ़ रही है।रवींद्रन का कहना है कि ऑनलाइन लर्निंग में बायजू तेजी से बढ़ रहा है। मार्च 2020 तक इसका रेवेन्यू दोगुने से भी ज्यादा होकर 3,000 करोड़ रुपए पहुंचने की उम्मीद है। ऑनलाइन लर्निंग इंडस्ट्री की ग्रोथ ने नैस्पर्स वेंचर्स, टेनसेन्ट होल्डिंग्स, सिक्योइया कैपिटल और फेसबुक के फाउंडर मार्क जकरबर्ग तक का ध्यान खींचा है।बायजू कन्टेंट को छोटा और आकर्षक बनाकर बच्चों का ध्यान खींचती है। रवींद्रन इंग्लिश स्पीकिंग देशों में भी पकड़ मजबूत करना चाहते हैं। उन्होंने पिछले दिनों ऐलान किया था कि बायजू वॉल्ट डिज्नी कंपनी के साथ मिलकर अगले साल अमेरिका में सर्विस शुरू करेगी।

क्लास भरने लगीं तो स्टेडियम में पढ़ाना शुरू किया था- दक्षिण भारत के तटवर्ती गांव में जन्मे रवींद्रन के मां-पिता स्कूल टीचर थे। रवींद्रन का मन स्कूल में नहीं लगता था। वे अक्सर फुटबॉल खेलने चले जाते थे। बाद में घर पर पढ़ाई करते थे। पढ़ाई पूरी कर रवींद्रन इंजीनियर बन गए और परीक्षा की तैयारी में छात्रों की मदद करने लगे। उनकी क्लासेज में स्टूडेंट इतने बढ़ गए कि स्टेडियम में एक साथ हजारों छात्रों को पढ़ाना शुरू कर दिया। इस तरह रवींद्रन एक सेलेब्रिटी टीचर बन गए थे।

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