Mon. Mar 25th, 2019

यूपी: एक्शन में भाजपा, बसपा के शीर्ष नेताओं में मची भगदड़

नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव में अब एक महीने से भी कम का समय बचा है, ऐसे में तमाम राजनीतिक दल अपने तमाम सियासी दांवपेंच को अपना रहे हैं। चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश में बसपा को बड़ा झटका लगा है। दरअसल मायावती ने सपा के साथ गठबंधन करके प्रदेश में एक साथ चुनाव लड़ने का ऐलान किया था और प्रदेश की तमाम सीटों पर सपा के साथ गठबंधन की घोषणा की थी। लेकिन महज दो महीने के भीतर बसपा के तकरीबन 15 बड़े नेताओं ने भाजपा का दामन थाम लिया है। गौर करने वाली बात यह है कि इसमे से 11 नेता ऐसे हैं जिन्होंने बसपा के टिकट से 2017 में उत्तर प्रदेश का विधान सभा चुनाव लड़ा था।

 

चुनाव से पहले बढ़ी सरगर्मी- उत्तर प्रदेश में सभी सात चरणों में मतदान होना है, यहां पहले चरण का मतदान 11 अप्रैल को होगा, जबकि आखिरी चरण का मतदान 19 मई को होगा। ऐसे में चुनाव की तारीखों से पहले ना सिर्फ बसपा बल्कि सपा, आरएलडी, कांग्रेस के तकरीबन 28 बड़े नेता भाजपा में शामिल हो गए हैं। पिछले एक महीने में इन तमाम दलों के 28 नेताओं के भाजपा में आने से सियासी हलचल काफी बढ़ गई है। लेकिन जिस तरह से बड़ी संख्या में बसपा के नेताओं ने भाजपा का दामन थामा है उसने बसपा की चिंता निसंदेह बढ़ा दी है। इन तमाम ने जिस तरह से बसपा का साथ छोड़ा है उससे साफ है कि ये सभी उम्मीदवार अपने संसदीय क्षेत्र से टिकट हासिल करना चाहते हैं।

 

भाजपा ने खोले दरवाजे- गौरतलब है कि सपा और बसपा ने उत्तर प्रदेश में गठबंधन में चुनाव लड़ने का ऐलान किया था। जिसमे से 38 सीटों पर मायावती की पार्टी चुनाव लड़ेगी, जबकि 37 सीटों पर अखिलेश यादव की पार्टी। वहीं इन सब के बीच भाजपा ने अपना रुख साफ कर दिया है और कहा है कि हमारे दरवाजे सभी पार्टियों के नेताओं के लिए खुले हैं, बशर्ते वो वोट हासिल कर सकते हों।

 

भाजपा की सियासी उठापटक- जिस तरह से बड़ी संख्या में बसपा के नेता पार्टी का दामन छोड़ रहे हैं उसके पीछे माना जा रहा है कि भाजपा की रणनीति है। दरअसल भाजपा प्रदेश में लोगों को यह संदेश देना चाहती है कि अभी भी भाजपा सबसे लोकप्रिय पार्टी है और आगामी चुनाव में वह लोगों की सबसे पहले पसंद है। ऐसे में बड़ी संख्या में बसपा के नेताओं का पार्टी छोड़ने मायावती के सियासी समीकरण को बड़ा झटका दे सकता है। जिन तमाम नेताओं ने बसपा का साथ छोड़ा है उसमे राज्य में मंत्री का पद संभाल चुके नेता भी हैं। साथ ही ऐसे नेता भी हैं जोकि पार्टी के संगठन में अहम भूमिका निभाते रहे हैं।

 

पीएम मोदी को चुनौती देने वाले भी भाजपा में शामिल- बसपा के विजय प्रकाश जयसवाल ने 12 मार्च को भाजपा का दामन था था। वह 2014 में बसपा के उम्मीदवार थे और भाजपा के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के खिलाफ उन्होंने 60579 वोट हासिल किए थे। जयसवाल ओबीसी उम्मीदवार हैं और जब वाराणसी की सीट गठबंधन में सपा के खाते में गई तो उन्होंने भाजपा का हाथ थाम लिया। उन्होंने कहा कि मैंने वाराणसी में अपनी व्यक्तिगत छवि के चलते वोट हासिल किए थए, नाकि बसपा की वजह से। मेरी उपस्थिति वाराणसी में भाजपा को मदद कर सकती है।

 

टिकट नहीं दिए जाने से नाराज- एक अन्य नेता जिन्होंने भाजपा का दामन थामा है वह आगरा से गुटियारी लाल दुवेश हैं। वह दलित नेता हैं और 2012 में बसपा के टिकट के विधायक चुने गए थे, लेकिन 2017 में वह चुनाव हार गए थे, हालांकि वह दूसरे पायदान पर रहे थे। बसपा के पूर्व राष्ट्रीय प्रवक्ता उम्मेद प्रताप सिंह जोकि 2007 में रामपुर खास से चुनाव हार गए थे उन्होंने भी भाजपा का दामन थाम लिया है। जब उन्हें प्रतापगढ़ से टिकट नहीं दिया गया तो वह भाजपा में शामिल हो गए।

 

कई अहम नेता भाजपा में शामिल हुए- इसके अलावा वेदराम भाटी जिन्होंने 2012 में जेवर से चुनाव जीता था, लेकिन 2017 में चुनाव हार गए थे। उन्होंने भी बसपा को छोड़ दिया है। बसपा ने यहां से इस बार यहां से सतवीर नागर को मैदान में उतारा है। यही नहीं मायावती सरकार में मंत्री रहे रामहेट भारती ने भी भाजपा का हाथ थाम लिया है। तीन बार विधायक रहे छोटेलाल वर्मा ने भी भाजपा का दामन थाम लिया। उन्होंने सपा के उम्मीदवार को फतेहाबाद में 2012 में चुनाव हराया था। वह मायावती की सरकार में मंत्री थे। उन्होंने कहा कि मैंने भाजपा का दामन इस उम्मीद में थामा है कि फतेहपुर सीकरी से मुझे लोकसभा का टिकट मिलेगा।

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